September 25, 2026

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मुख्यमंत्री प्रश्नकाल समाप्त, दलबदल मामले में स्पीकर अब नहीं ले पाएंगे स्वतः संज्ञान

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रांची। झारखंड विधानसभा कार्य संचालन नियमावली में गुरुवार को कई महत्वपूर्ण संशोधन के प्रस्ताव को सदन में मंजूरी दे दी गयी। इसके तहत मुख्यमंत्री प्रश्नकाल अब समाप्त हो गया, वहीं दलबदल मामले में स्पीकर अब स्वतः संज्ञान नहीं ले पाएंगे, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति विधायकों के दलबदल मामले में विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधीकरण में याचिका दायर कर सकता हैं।
विधायक दीपक बिरूवा की अध्यक्षता में झारखंड विधानसभा कार्य संचालन नियमावली में संशोधन को लेकर गठित नियम समिति की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री प्रश्नकाल को खत्म करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गयी। इसके  साथ ही अब शून्यकाल 15 की जगह 25 की संख्या में लिये जाएंगे। वहीं सत्र आहूत होते ही अल्पसूचित और तारांकित प्रश्न दिये जा सके। इसके साथ ही झारखंड विधानसभा दल परिवर्त्तन पर सदस्यता से निरहर्ता के नियम 2006 में संशोधन पर भी सहमति दी गयी। इसके तहत अब दलबदल मामले में कोई भी व्यक्ति विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण में याचिका दायर कर सकता है।  विधानसभा अध्यक्ष अब दल बदल मामले में स्वतः संज्ञान नहीं ले सकेंगे।

कृषि उपज-पशुधन विपणन विधेयक भी ध्वनिमत से पारित
झारखंड विधानसभा में झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2022 को भी विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले सदन पटल पर संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम द्वारा मृतक दारोगा रूपा तिर्की  मामले में झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीके गुप्ता की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट भी सदन पटल पर रखी गयी।  

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