रफ्तार में रहती है भ्रम की गुंजाइश
रांची। आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था मे चालू वित्त वर्ष 2022-23की अप्रैल-जून पहली तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर के अधिकारिक आंकड़े 31अगस्त को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी करेगा ।
विकास दर के इन अधिकारिक आंकड़ों से यह पता चलेगा कि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि यानि पहली तिमाही मे जो जीडीपी थी उसकी तुलना में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही मे जीडीपी कितना बढ़ी और किस रफ्तार से बढ़ी ।
यह आपको बताते चलें कि गत वित्त वर्ष की अप्रैल जून तिमाही मे 32.38 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी थी जो 20.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी । इतना मालूम रहने से यह आकलन करना आसान हो जायेगा कि देश का आर्थिक स्वास्थ्य नये जीडीपी प्रिंट मे कैसा है। आरबीआई की मौद्रिक समिति के आर्थिक विशेषज्ञों ने पहली तिमाही की जीडीपी की वृद्धि दर का जो अनुमान 16.2 प्रतिशत का लगाया है वह वाकई बहुत शानदार है। देश के विभिन्न वित्तीय संस्थानों और रिसर्च ऐजेंसियों के अनुमान भी 12.5 से लेकर 15 प्रतिशत तक की वृद्धि के हैं जो यह बताने के लिए काफी हैं कि भारत विश्व मे सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।
परंतु कोविड पूर्व वित्त वर्ष 2019-20की पहली तिमाही यानि अप्रैल जून 2019 मे जीडीपी का आकार 35.66 लाख करोड़ रुपये का था और इस स्तर को दो वर्ष बाद 2021-22 की पहली तिमाही मे भी हासिल नही किया जा सका बावजूद इसके की 20.1 प्रतिशत की वृद्धि दर से जीडीपी बढी थी।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही मे जीडीपी ग्रोथ रेट यदि 10प्रतिशत भी रहे तो भी देश की अर्थव्यवस्था तीन साल पूर्व के जीडीपी लेवल से कम ही होगी ।
हालांकि जिस तरह के 12 से 15प्रतिशत की तेज वृद्धि का अनुमान विशेषज्ञों ने लगाया है। उससे हम आश्वस्त हो सकते हैं कि अप्रैल जून 2022तिमाही मे जीडीपी का आकार जो स्वरूप लेगा वह कोविड पूर्व 2019-20 पहली तिमाही के स्तर को पार कर जायेगा ।
देश की अर्थव्यवस्था यदि आज भी तीन साल पूर्व के स्तर को बमुश्किल पा लेती है तो इस शानदार वृद्धि दर पर हमे विश्व विजयी का भाव लेकर आत्म मुग्ध होने के बजाय आत्म चिंतन करने की जरूरत है कि तीन साल के गैप को कैसे पूरा किया जाय।

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