April 18, 2026

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छठ महापर्व : 8 नवंबर को नहाय-खाय से होगा पर्व का शुभारंभ

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रांची। दिवाली का त्योहार बीत चुका है, अब लोग छठ पूजा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर छठ महापर्व (Chhath Mahaparv) धूमधाम से मनाया जाता है. व्रती भगवान सूर्य की उपासना करती हैं। 4 दिनों तक चलने वाला छठ महापर्व की शुरूआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ होता है। छठ पूजा चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से प्रारंभ होता है, फिर पंचमी को लोहंडा और खरना के दिन से व्रत शुरू होता है और व्रती 36 घंटे तक उपवास रखती हैं। षष्ठी के दिन सूर्य देव की पूजा कर उन्हें अस्ताचलगामी अर्घ्य अर्पित किया जाता है। अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। फिर पारण करके व्रती अपना उपवास खोलती हैं।
8 नवंबर 2021 को नहाय-खाय के दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है, फिर नहाने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है. इस दिन व्रती चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण करती है। उसके बाद छठ सम्पन्न होने के बाद ही व्रती भोजन करती है, इस दिन छठ में चढ़ने वाला खास प्रसाद ठेकुआ के लिए गेंहू को धोकर सुखाया भी जाता है। खरना कार्तिक मास की पंचमी को मनाया जाता है। खरना नहाय खाय के अगले दिन मनाया जाता है, इसे लोहंडा भी कहा जाता है, इस साल खरना 9 नवंबर को है। छठ महापर्व में खरना का खास महत्व है क्योंकि इस दिन व्रती दिनभर व्रत रखती हैं, शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा के बाद यह प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद छठ के समापन के बाद ही अन्न-जल ग्रहण किया जाता है। कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को पहला अर्घ्य है। इस साल 10 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती दिन भर निर्जला व्रत रखती है और शाम में किसी तालाब, नदी या जलकुंभ में जाकर सूर्य की उपासना करती है और डूबते हुए सूर्य के अंतिम किरण को दूध और पानी से अर्घ्य देती है। कार्तिक मास की सप्तमी तिथि को छठ का समापन किया जाता है। इस साल 11 नवंबर को उगते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जायेगा। इसके बाद पारण करके पूजा का समापन हो जायेगा।

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