रांची। झाविमो से बीजेपी में गये बाबूलाल मरांडी के दलबदल मामले में झारखंड विधानसभा के न्यायाधिकरण में सुनवाई पूरी हो गयी है। विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।
स्पीकर के न्यायाधिकरण में मंगलवार को दलबदल मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता द्वारा बार-बार गवाहों को पेश करने की मांग को न्यायाधिकरण ने खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण की ओर से साफ कहा गया कि जिन आठ बिन्दुओं को कोर्ट ने पूर्व में निर्धारित कर रखा है, उस पर बात करें। जिसका बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि उन्हें संवैधानिक प्रावधानों का ेरखने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने न्यायाधिकरण के समक्ष बार-बार प्रोपोज्ड इश्यू और साक्ष्य को रखने की मांग की। बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि दल बदल मामले में एक ही तरह के सात मामले हैं, लेकिन सिर्फ बाबूलाल मरांडी के मामले में तेजी है,जबकि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के मामले पर कुछ नहीं हो रहा है। यह आधा और अपूर्ण सुनवाई के आधार पर फैसला देने की तैयारी न्यायोचित नहीं है।
न्यायाधिकरण ने सभी बिन्दुओं को सुनने के बाद बाबूलाल मरांडी की सदस्यता से जुड़े मामले पर आदेश सुरक्षित रख लिया है और कभी भी इस पर स्पीकर अपना फैसला सुना सकते है। ये चार मामले राजकुमार यादव बनाम बाबूलाल मरांडी, भूषण तिर्की बनाम बाबूलाल मरांडी, दीपिका पांडेय सिंह बनाम बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव व बंधु तिर्की बनाम बाबूलाल मरांडी है।
स्पीकर के न्यायाधिकरण में 1 सितंबर को कांग्रेस के तीन विधायकों इरफान अंसारी, नमन विक्सल कोंगाड़ी और राजेश कच्छप के मामले में सुनवाई होगी। इसके अलावा विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के मामले में भी सुनवाई हो सकती है।

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