रांची। राज्यभर में आज विजयादशमी (vijadasmi)की धूम देखी जा रही है। पूजा पंडालों में महिलाओं ने मां दुर्गा (maa Durga)को सिंदूर लगाकर विदाई दी और सिंदूर खेल खेला(Farewell to Maa Durga with Sindoor Khela)।
राजधानी रांची स्थित दुर्गाबाड़ी में सिंदूर खेल का क्षण बड़ा ही भावुक, खूबसूरत और मनभावन था। मां दुर्गा की नौ दिनों की पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को विदाई दी गयी।
बांग्ला रीति रिवाज के साथ जिन पूजा पंडालों में शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना की गयी थी, वहां सिंदूर खेला की रस्म अदायगी की गयी। सिंदूर खेला के दौरान जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाएं सिंदूर खेला में शामिल हुईं। कोरोना काल में सरकारी नियमों के अनुसार पूजा-अर्चना संपन् हुई।
बांग्ला रीति-रिवाज और परंपरा में विजय दशमी पर सिंदूर खेला को महत्वपूर्ण रस्म मान जाता है। शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन दुर्गा पूजा और दशहरा के अवसर पर महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं, जिसे सिंदूर खेला के नाम से पहचाना जाता है। इस दिन पंडाल में मौजूद सभी सुहागन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। यह खास उत्सव मां की विदाई के रूप में मनाया जाता है। सिंदूर खेला के दिन पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श करते हुए उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगाकर महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बाद मां को पान और मिठाई का भोग लगाया जाता है। यह उत्सव महिलाएं दुर्गा विसर्जन या दशहरा के दिन मनाती हैं।

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